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URPA:उत्तराखंड रीजनल पार्टी अलायंस (यूआरपीए) ने शुक्रवार को आगामी लोकसभा चुनावों के लिए सभी पांच सीटों पर अपने समर्थित उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. यूआरपीए ने इस बार क्षेत्रीय दलों को मजबूत करने और तथाकथित “दिल्ली के दलों” के वर्चस्व को खत्म करने का आह्वान किया है.
यूआरपीए ने किन उम्मीदवारों को दिया समर्थन?
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यूआरपीए का आरोप – उत्तराखंड को बनाया उपनिवेश?
यूआरपीए गठबंधन के संयोजक शिवप्रसाद सेमवाल ने दावा किया कि कांग्रेस और बीजेपी जैसे राष्ट्रीय दल उत्तराखंड को अपना उपनिवेश बनाकर रखते हैं. उन्होंने कहा कि दिल्ली से रिमोट कंट्रोल द्वारा राज्य की राजनीति का संचालन किया जाता है, जोकि खत्म होना चाहिए.
क्षेत्रीय मुद्दों पर फोकस!
शिवप्रसाद सेमवाल ने यह भी कहा कि यूआरपीए का लक्ष्य है कि इस बार ऐसे उम्मीदवारों को चुना जाए जो उत्तराखंड के असली मुद्दों पर ध्यान दें. उन्होंने कहा कि राज्य में लंबे समय से लटके पड़े मुद्दों जैसे – संपत्ति बंटवारा, मूलनिवासी कानून, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, पेपर लीक और भर्ती घोटालों आदि का समाधान हो सके.
क्या कमजोर होंगे राष्ट्रीय दल?
यह देखना होगा कि यूआरपीए का यह दांव उत्तराखंड में कितना सफल रहता है और क्या राष्ट्रीय पार्टियों का दबदबा कमजोर पड़ता है.
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