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UP Bureaucracy: लखनऊ। यूपी की नौकरशाही में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। तभी तो मुख्य सचिव पद के दावेदार आईएएस अफसर एक-दूसरे की पोल पट्टी खोलने के लिए मोर्चा खोल रखा है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण केन्द्रीय कार्मिक लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय (डीओपीटी) द्वारा मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री को जनवरी व फरवरी 2025 में भेजी गई चिट्ठी में यूपी की सत्ता में सबसे शीर्ष पद पर पोस्टेड आईएएस अफसरों के काले कारनामों की जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। तब से इस चिट्ठी को दबाने के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन दो वरिष्ठ आईएएस अफसरों की आपसी प्रतिद्वंद्विता युद्घ के कारण जनता के सामने पोल पट्टी खुलने लगी है। जिससे यूपी सरकार की छवि खराब हो रही है।
उल्लेखनीय है कि डीओपीटी के अंडर सेक्रेटरी रूपेश कुमार ने 30 जनवरी 2025 को यूपी के मुख्य सचिव को एक पत्र लिखा। इस पत्र में कहा गया कि दिल्ली निवासी सुबित कुमार सिंह ने 12 नवम्बर 2024 को यूपी के एक वरिष्ठ आईएएस अफसरों के कारनामों की शिकायत की है। इस पर कार्रवाई की जाए। जब इस पत्र पर कार्रवाई नहीं हुई तो प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री को 19 फरवरी 2025 को फिर कार्रवाई के लिए एक रिमांइडर लेटर भेजा गया। चूंकि डीओपीटी के पत्र में काले कारनामों करने वाले आईएएस अफसर का नाम उल्लेख नहीं है। लेकिन इक्लोजर में लगे शिकायती पत्र में सब कुछ साफ है।


इस पत्र को लेकर सत्ता के गलियारों में खूब चर्चा है। लेकिन इस पर भी यूपी की ब्यूरोक्रेसी ने चुप्पी साध ली। इस प्रकरण पर भले ही शांति नजर आ रही थी। दो दिन पूर्व एक पूर्व आईपीएस और सामाजिक कार्यकर्ता व नेता ने पंचमतल पर आठ वर्षो से तैनात एक वरिष्ठ आईएएस और उनके परिजनों द्वारा अंसल में ली गई सम्पत्तियों का खुलासा कर यूपी की ब्यूरोक्रेसी में हलचल मचा दी। यह खुलासा डीओपीटी द्वारा भेजे पत्र के जवाब में बताया जा रहा है।
यूपी की नौकरशाही के सूत्रों का कहना है कि शीर्ष पद पर तैनात आईएएस अफसर का रिटायरमेंट जुलाई 2025 में है। अगर इस आईएएस का कार्यकाल बढ़ता है तो दावेदार आईएएस अफसर प्रभावित होगा। कार्यकाल न बढ़े, इसलिए शिकायत हुई है। शिकायत में बहुत सारे कारनामों का सिलसिलेवार ब्यौरा दिया गया है। अगर जांच हुई तो कार्यकाल नहीं बढ़ पाएगा। मुख्य सचिव की दौड़ में भावी उम्मीदवार की अघोषित सम्पत्तियों के खुलासे ने दावेदारी पर पानी फिर सकता है। वैसे ये आईएएस महोदय यूपी के पहले कैबिनेट सेक्रेटरी से ट्रेनिंग ली है। जिन्होंने यूपी की आईएएस एसोसियेशन को अपने ठैंगे पर रखने का रिकार्ड बनाया था। दो आईएएस अफसरों की आपसी खुन्नस में यूपी सरकार की खूब बदनामी हो रही है।
कृषि उत्पादन आयुक्त पर तैनात आईएएस अफसर का रिटायरमेंट अप्रैल 2025 में है, जुलाई 2025 में मुख्य सचिव का रिटायरमेंट है। इसलिए कृषि उत्पादन आयुक्त और मुख्य सचिव पद के लिए दावेदार अफसरों में रेस शुरू हो गई है। पर्दे के पीछे शह-मात का खेल चल रहा है। मुख्य सचिव की दौड़ में 1989 बैच तीन आईएएस अफसरों के बीच में है। पहले वरिष्ठ आईएएस अफसर पंचम तल पर तैनात हैं। दूसरे केन्द्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। तीसरे वित्त में हैं। इन्हीं तीन आईएएस अफसरों में यूपी का नया मुख्य सचिव बनेगा। कृषि उत्पादन आयुक्त के पद पर वित्त वाले आईएएस ग्राम्य विकास विभाग और राजभवन में तैनात आईएएस अफसर भी रेस में हैं।
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