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Ias officer : लखनऊ। ढिंढोरा पीट कर ईमानदार छवि का मुलम्मा चढ़ाने वाले प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री के विभाग का एक अफसर यूपी की नाक महाराष्ट्र में कटवा दी है। मुम्बई के वशी इलाके में बने राज्य सम्पत्ति विभाग के गेस्ट हाउस के मुख्य व्यवस्थाधिकारी के उत्पीडऩ से अजीज एक महाराष्ट्रियन महिला ने एफआईआर दर्ज करवाई है। एफआईआर दर्ज करवाने से पहले पीडि़त महाराष्ट्रियन महिला ने यूपी के मुख्यमंत्री और राज्य सम्पत्ति अधिकारी को साक्ष्य भेजकर न्याय की गुहार लगाई थी। लेकिन ईमानदार प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री के कानों में पीडि़त महिला की आवाज नहीं पहुंच पाई है। इससे जहां आरोपी अफसर के हौंसले बुलंद हैं वहीं यह प्रकरण राज्य सम्पत्ति विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है।
बताते चलें कि बीती 11 जून को एक महाराष्ट्रियन महिला ने नवीं मुम्बई स्थिति उत्तर प्रदेश का गेस्ट हाउस (वृंदावन) के मुख्य व्यवस्थाधिकारी राहुल तनखा पर शारीरिक शोषण का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करवाया है। महाराष्ट्र पुलिस ने राहुल तनखा के खिलाफ संगीन धाराओं 354, 354 ए, 354 डी, 506 में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। गंभीर धाराओं में दर्ज मुकदमें दर्ज होने के बावजूद आरोपी अफसर के खिलाफ राज्य सम्पत्ति विभाग ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। जबकि यह प्रकरण विभाग के प्रमुख सचिव शशि प्रकाश गोयल और राज्य सम्पत्ति अधिकारी बी.के. सिंह तक पहुंच गया है।
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राज्य सम्पत्ति विभाग के सूत्रों का कहना है कि महाराष्ट्र की एक महिला ने जनवरी माह में मुम्बई के वशी इलाके में बने राज्य सम्पत्ति विभाग के गेस्ट हाउस के मुख्य व्यवस्थाधिकारी राहुल तनखा के अश्लील कारनामों की एक वीडियो क्लिप हर विभागीय अफसरों के पास घूमफिर रही थी। कुछ समय बाद वहां के काफी कर्मचारियों द्वारा अनियमितताओं की शिकायत भी की गई थी। लेकिन राज्य सम्पत्ति विभाग के आला अफसरों ने अपने चहेते अफसर के कारनामों पर आंख मूंद ली थी। सूत्रों का कहना है कि मुम्बई में यूपी सरकार की नाक कटवाने वाले आरोपी अफसर के खिलाफ प्रमुख सचिव और राज्य सम्पत्ति अधिकारी के काफी करीबी होने के कारण कार्रवाई नहीं हो पाई है। जबकि महिला उत्पीडऩ के मामलों में यूपी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति है।
इस संबंध में मुम्बई के वशी इलाके में बने राज्य सम्पत्ति विभाग के गेस्ट हाउस के मुख्य व्यवस्थाधिकारी राहुल तनखा के मोबाइल पर कई बार सम्पर्क किए जाने पर मोबाइल स्विच ऑफ मिलने से प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई। राज्य सम्पत्ति अधिकारी बी.के. सिंह और प्रमुख सचिव राज्य सम्पत्ति शशि प्रकाश गोयल से भी सम्र्पक किए जाने पर प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।
1989 बैच के वरिष्ठï आईएएस अफसर शशि प्रकाश गोयल बीते छह साल से योगी सरकार के प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री के साथ ही राज्य सम्पत्ति विभाग का भी दायित्व है। ईमानदारी के प्रकाश से प्रज्जवालित इस अफसर पर कई बार कोयले की खान में जाने का आरोप लगा, लेकिन हर बार दूध के धुले साबित हुए हैं। राज्य सम्पत्ति विभाग के अधिकतर व्यवस्थाधिकारियों पर इनकी खासी मेहरबानी हैं। इस मेहरबानी का उदहारण आप यूपी सदन (त्रिवेणी)के मुख्य व्यवस्थाधिकारी के पद पर लम्बे समय से तैनात राजीव तिवारी को देख सकते हैं। इस व्यवस्थाधिकारी पर न तो ट्रांसफर पॉलिसी का प्रभाव पड़ता है और न ही अनियमितताओं की तमाम शिकायतें होने के बावजूद कोई भी कार्रवाई होती है। संरक्षण के कारण राज्य सम्पत्ति विभाग का हर अफसर इस व्यवस्था अधिकारी से घबराता है। राज्य सम्पत्ति विभाग के सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश सदन (त्रिवेणी) में भी इसी तरह का एक कांड हुआ था। लेकिन मामला हाईप्रोफाइल होने के कारण दब गया था।
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