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राजेन्द्र के. गौतम
लखनऊ। नेता विपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी आज भाजपा पर वोट चोरी करने का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन अगर आप इतिहास के पन्नों को खंगालेंगे तो वोट चोरी रोकने का विरोध करने पर सत्तारूढ़ कल्याण सिंह नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने बसपा सुप्रीमो मायावती को 35 साल पहले रासुका लगाकर सेन्ट्रल जेल नैनी इलाहाबाद भेजा था। बसपा सुप्रीमो मायावती ने यह बातें ‘मेरा संघर्षमय जीवन एवं बहुजन मूवमेंट सफरनामा’ के प्रथम भाग में बतौर लेखिका लिखा है। उन्होंने लिखा कि मनुवादियों द्वारा वोट लूट का मेरे द्वारा किए गए विरोध के कारण राष्टï्रीय सुरक्षा के लिए बने रासुका कानून का राजनीतिक दुरुपयोग करते हुए मुझे नैनी जेल में कैद रखा गया था।

आपको बताते चलें कि चार बार की यूपी की मुख्यमंत्री रहीं और बसपा सुप्रीमो सुश्री मायावती ‘मेरा संघर्षमय जीवन एवं बहुजन मूवमेंट सफरनामा’ के प्रथम भाग के पेज नम्बर 491 से लेकर 497 तक में पूरे घटनाक्रम का उल्लेख किया है। घटनाक्रम के मुताबिक बात 16 नवम्बर 1991 की है। उस समय बुलंदशहर की लोकसभा सीट के उपचुनाव के लिए बसपा की प्रत्याशी के तौर सुश्री मायावती मैदान में थी। गिझोरी गांव के बूथ नम्बर 140 पर पुलिस के बल पर हो रही बूथ कैप्चरिंग रुकवाने के लिए चुनाव अधिकारी के पास रिपोर्ट दर्ज करवाने गई थी। बुलंदशहर के जिलाधिकारी लाल बहादुर तिवारी और पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार सिंह ने मेरे ऊपर झूठा आरोप लगाकर रासुका तामील किया और नैनी जेल भेज दिया गया था। इसके बाद पुलिस ने चुनाव प्रभावित करवाने के लिए खूब लाठीचार्ज किया। दलित मतदाताओं को मारा-पीट कर वोट डालने से रोका।


इस प्रकरण के विरोध में हजारों मतदाताओं ने दिल्ली तक पैदल मार्च किया। दिल्ली में बसपा संस्थापक मान्यवर कांशीराम जी ने इसे सरकारी आतंकवाद बताया था। उन्होंने कहा कि गुण्डागर्दी, अफसरशाही और नौकशाही के बल पर वोट की लूट और चोरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि आज देश में सबसे बड़ा आतंक सरकारी आतंकवाद है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान में सरकारी आतंकवाद बढ़ा है। सरकारी आतंकवाद के खिलाफ लोग उठ खड़े हुए हैं। अब देश के मनुवादियों को महंगा पड़ेगा।


बसपा सुप्रीमो मायावती ने आगे लिखा कि बुलंदशहर के उपचुनाव में व्यापक पैमाने पर हुई वोट चोरी और धांधली के बावजूद 73544 वोट मिले। अगर चुनाव में व्यापक पैमाने पर धांधली नहीं होती तो मुझे चुनाव जीतने से कोई नहीं रोक सकता था। इस प्रकार वोट की रक्षा भरपूर ढंग से प्रयास के कारण मुझे 1992 में ही सरकारी आतंकवाद का सामना करना पड़ा था।
BSP